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career की एकाउंटेंसी (ACCOUNTANCY)…

Posted by librarykvongole on May 1, 2015

LIBRARY, K V – BASTI

career की एकाउंटेंसी–

कॉमर्स आज के दौर में बेहद डिमांडिंग फील्ड बन गया है। उदारीकरण के दौर में देश में निजी कंपनियों के विस्तार और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के आगमन से सीए, आइसीडब्ल्यूए, सीएस, कंप्यूटर एकाउंटेंसी के एक्सपटï्र्स की मांग लगातार बढ़ रही है। कॉमर्स एक ऐसा फील्ड है, जिसमें आपका करियर ग्राफ तेजी से बढ़ता है। वैसे तो ज्यादातर कॉमर्स के स्टूडेंट्स ही एकाउंटिंग के क्षेत्र में जाना चाहते हैं, लेकिन दूसरे स्ट्रीम के स्टूडेंट्स के लिए भी इसके रास्ते खुले हुए हैं। जानते हैं इससे संबंधित कुछ प्रमुख स्ट्रीम्स और उनमें एंट्री के बारे में…

चार्टर्ड एकाउंटेंट

सीए सुधीर सचदेवा

एवीपी, एकेडमिक एलायंसेज

चार्टर्ड एकाउंटेंट्स की डिमांड दिनों दिन बढ़ रही है। यहां तक कि छोटी कंपनीज और बिजनेसमैन को भी आर्थिक मसलों के प्रबंधन के लिए सीए की जरूरत होती है। कंपनी अधिनियम के अनुसार इंडिया में किसी कंपनी में ऑडिङ्क्षटग के लिए सिर्फ सीए को ही हायर किया जा सकता है।

कोर्स: सीए एक प्रोफेशनल कोर्स है जिसमें फाइनेेंशियल मैनेजमेंट, टैक्सेशन और एकाउंटिंग की पढ़ाई होती है। इस कोर्स के तहत तीन चरण होते हैं। पहला, कॉमन प्रोफिसिएंसी टेस्ट (सीपीटी) जिसमें एकाउंटिंग, मर्केंटाइल लॉ, जनरल इकोनॉमिक्स और क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूड के एंट्री लेवल के टेस्ट होते हैं। दूसरे चरण में इंटीग्रेटेड प्रोफेशनल कॉम्पिटेंस कोर्स (आइपीसीसी) को पूरा करना होता है। यह सीए करिकुलम का पहला ऐसा चरण है जिसमें एकाउंटेंसी प्रोफेशन के कोर एवं एलायड सब्जेक्ट्स की केवल वर्किंग नॉलेज को कवर किया जाता है। तीसरा चरण सीए फाइनल कहलाता है, जिसके तहत फाइनेंशियल रिपोर्टिंग, स्ट्रेटेजिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट, एडवांस मैनेजमेंट एकाउंटिंग, एडवांस ऑडिटिंग जैसे विषयों के एडवांस एप्लीकेशन नॉलेज को कवर किया जाता है। आइपीसीसी के ग्रुप को पास करने के बाद किसी अनुभवी सीए के अंडर में तीन साल की आर्टिकलशिप करनी होती है। इस दौरान स्टाइपेंड भी मिलता है। दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया सीए की एग्जामिनिंग और लाइसेंसिंग बॉडी है। यही कोर्स संचालित करती है और ट्रेनिंग पूरी होने पर मेंबरशिप देती है।

एलिजिबिलिटी: सीए प्रोग्राम करने के लिए स्टूडेंट्स को बारहवीं या उसके समकक्ष एग्जाम पास होना चाहिए। ऑडिटिंग, कॉमर्शियल लॉ, एकाउंटेंसी के साथ कॉमर्स में ग्रेजुएशन करने वाले भी इसे कर सकते हैं। आट्र्स और साइंस स्ट्रीम के स्टूडेंट्स भी सीए कोर्स कर सकते हैं।

स्कोप: एक सीए प्राइवेट प्रैक्टिस करने के साथ ही कंपनीज की फाइनेंशियल एकाउंटिंग या टैक्सेशन डिपार्टमेंट में काम कर सकता है। वह कॉरपोरेट फाइनेंस, मैनेजमेंट कंसल्टेंसी के अलावा बैंक, ऑडिटिंग फम्र्स, लीगल फम्र्स आदि में अपनी सेवाएं दे सकता है। इंडियन चार्टर्ड एकाउंटेंट्स की विदेशों में भी अच्छी मांग है। खासकर पश्चिम एशिया के देशों, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर में। इंडिया में भी कंपनीज में सीए की हायरिंग बढ़ी है।

कंपनी सेक्रेटरी

सीएस देव शर्मा

साइबर लॉ एक्सपर्ट

कॉमर्स स्ट्रीम वालों के लिए कंपनी सेक्रेटरी एक लुक्रेटिव करियर ऑप्शन हो गया है। एक सीएस, लॉ एक्सपर्ट के साथ-साथ कॉरपोरेट लॉ और कंपनी बोड्र्स में अलग-अलग भूमिकाएं निभा सकता है। जो यंगस्टर्स लॉ में पैशन रखते हैं, वे इस कोर्स के बाद इंडिया के टॉप लॉ फम्र्स में काम कर सकते हैं। विदेशों में इन्हें चार्टर्ड सेक्रेटरी, लीगल सेक्रेटरी के तौर पर काम करने का अवसर मिलता है।

कोर्स: कंपनी सेक्रेटरी बनने के लिए किसी कैंडिडेट को सबसे पहले फाउंडेशन कोर्स करना होता है। इसके बाद उन्हें एग्जिक्यूटिव मॉड्यूल और आखिरी स्टेप में प्रोफेशनल मॉड्यूल में प्रमोट किया जाता है। हालांकि, एक ग्रेजुएट (आट्र्स स्ट्रीम छोड़कर) सीधे एग्जीक्यूटिव लेवल पर ज्वाइन कर सकता है। इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरी ऑफ इंडिया से कैंडिडेट सीएस का सर्टिफिकेशन कोर्स कर सकते हैं। यही इंस्टीट्यूट कोर्स का प्रबंधन करता है। आप इंस्टीट्यूट की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन एडमिशन भी ले सकते हैं।

एलिजिबिलिटी: सीएस करने के लिए कैंडिडेट को साइंस या कॉमर्स स्ट्रीम से बारहवीं या ग्रेजुएशन करना होगा। फिलहाल इसके लिए किसी तरह का एंट्रेंस एग्जाम नहींदेना होता है।

स्कोप: एक सीएस इंडिया के अलावा यूके, डेनमार्क, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, कनाडा, मलेशिया, दुबई, न्यूजीलैंड आदि देशों में अपना करियर शुरू कर सकता है। 10 करोड़ रुपये के पेड-अप कैपिटल वाली किसी भी लिस्टेड या पब्लिक कंपनी में सीएस को रखना अनिवार्य है।

कंप्यूटर एकाउंटेंसी

अनुपम श्रीवास्तव

डायरेक्टर, आइसीए,

पूसा रोड, दिल्ली

कंप्यूटर क्रांति ने एकाउंटिंग को मोटे-मोटे रजिस्टरों और बहीखातों, लेजर रजिस्टरों से छुटकारा दिला दिया है। इनकी जगह अब कंप्यूटरों ने ले ली है, जिससे कंपनी के लेन-देन, सैलरी, पीएफ, ग्रेच्युटी, आयकर आदि के रिकॉर्ड मिनटों में स्टोर हो जाते हैं।

स्टडी में क्या-क्या?

कंप्यूटर एकाउंटेंसी के तहत मुख्यत: बिजनेस एकाउंटिंग, बिजनेस कम्युनिकेशन, एडवांस एकाउंट्स, एडवांस एमएस एक्सेल, टैक्सेज, आइएफआरएस, फाइनेंशियल मैनेजमेंट, इनकम टैक्स प्लानिंग आदि की प्रैक्टिकल और जॉब ओरिएंटेड ट्रेनिंग दी जाती है।

एलिजिबिलिटी

इस फील्ड में आने के लिए बारहवीं के बाद कंप्यूटर एकाउंटेंसी का कोर्स किया जा सकता हैै। वैसे कॉमर्स ग्रेजुएट्स को इसमें प्रिऑरिटी दी जाती है।

कोर्स

कंप्यूटर एकाउंटेंसी कोर्स छह महीने से लेकर डेढ़ साल तक का होता है। इसे इंडस्ट्रियल ऑडिटिंग ऐंड फाइनेंशियल कंप्यूटिंग का नाम दिया जाता है।

इंस्टीट्यूट्स

-द इंस्टीटयूट ऑफ कंप्यूटर एकाउंट्स, पूसा रोड, दिल्ली

http://aceeducateurs.com/

-एनआइआइटी कंप्यूटर एजुकेशन सेंटर, दिल्ली

http://www.niit.com

-इंस्टीट्यूट ऑफ फाइनेंस ऐंड कंप्यूटर एकाउंटिंग, दिल्ली

http://www.iifca.com/

-द इंस्टीटयूट ऑफ प्रोफेशनल एकाउंट्स, दिल्ली

http://www.tipa.in

सीएमए

सीएमए चंदर दुरेजा

फैकल्टी, सुपरप्रॉफ

कॉस्ट ऐंड वर्क एकाउंटेंट्स किसी कंपनी की बिजनेस पॉलिसी तैयार करते हैं। इसके साथ ही पुराने एवं मौजूदा वित्तीय प्रदर्शन के आधार पर किसी प्रोजेक्ट के लिए अनुमान जाहिर करते हैं। पहले यह कोर्स इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट ऐंड वक्र्स एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आइसीडब्ल्यूएआइ) संचालित करता था, लेकिन अब इसका नाम इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट एकाउंटेंट ऑफ इंडिया (आइसीएआइ) कर दिया गया है। इस तरह यह कोर्स कंप्लीट करने वाले कॉस्ट ऐंड मैनेजमेंट एकाउंटेंट (सीएमए) कहलाते हैं। ?

कोर्स : सीएमए के अंतर्गत एक स्टूडेंट को तीन लेवल पार करने होते हैं। पहला फाउंडेशन, दूसरा इंटरमीडिएट और तीसरा फाइनल। इसकी परीक्षा साल में दो बार, जून और दिसंबर में आयोजित की जाती है। सीएमए के तहत स्टूडेंट्स को कॉस्ट एकाउंटिंग, कॉस्ट ऑडिट, टैक्सेशन, फाइनेंशियल मैनेजमेंट और फाइनेंशियल एकाउंटिंग पढ़ाया जाता है।

एलिजिबिलिटी : सीएमए का कोर्स करने के लिए स्टूडेंट को 12वीं पास करना होगा। इसके बाद वह फाउंडेशन कोर्स में एडमिशन ले सकता है। इसी तरह एक ग्रेजुएट सीधे इंटरमीडिएट लेवल में दाखिला ले सकता है। हां, उन्हें इस बात का ध्यान रखना होगा कि एडमिशन परीक्षा के कम से कम चार महीने पहले हो। आमतौर पर एक स्टूडेंट को सीएमए कोर्स पूरा करने में तीन से साढ़े तीन साल लग जाते हैं। हालांकि इसमें प्रैक्टिकल ट्रेनिंग भी शामिल है।

स्कोप : इंडिया में रिलायंस, एचडीएफसी, आइओसी, जिंदल, टीसीएस जैसी कंपनीज में सीएमए की काफी डिमांड है। आप चाहें, तो कॉस्ट ऑडिट, टैक्सेशन या फाइनेंस के क्षेत्र में इंडिपेंडेंट प्रैक्टिस भी शुरू कर सकते हैं।?

इंश्योरेंस सेक्टर

अगर आपने अपने स्कूल टाइम में या उसके बाद कभी भी यह फील किया है कि आपके पास अच्छी पीपुल व सेलिंग स्किल्स हैं, तो इंश्योरेंस सेक्टर आपके लिए बेटर ऑप्शन है।

अनंत संभावनाओं वाला फील्ड

दस-बारह साल पहले तक एलआइसी (लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन) और जीआइसी (जनरल इश्योरेंस कॉरपोरेशन) ही इंश्योरेंस सेक्टर के किंग थे। आज स्थितियां बदल चुकी हंै। अब इंश्योरेंस के क्षेत्र में देश और विदेश के कई बड़े व्यापारिक घराने, बैंक और कंपनियां कूद चुकी हैं। आज यह उद्योग करोड़ों का हो चुका है और इसमें नौकरियों की भरमार है।

कैसे करें शुरुआत

इसके लिए आपको इरडा (भारतीय बीमा नियामक प्राधिकरण) द्वारा संचालित एजेंट परीक्षा पास करनी होगी।

जरूरी स्किल्स

इसके लिए दो तरह के स्किल की जरूरत होती है, पहला, लोगों को आसानी से दोस्त बनाना और दूसरा, उनकी परेशानी को सही तरीके से पहचान कर इंश्योरेंस की इंपॉर्र्टेंस को समझाना।?

प्रमुख कोर्स

बीए (इंश्योरेंस), अवधि-3 साल,

कोर्स फॉर इंश्योरेंस एजेंट, अवधि-3 से 5 महीने

प्रमुख इंस्टीट्यूट

इंस्टीट्यूट ऑफ इंश्योरेंस ऐंड रिस्क मैनेजमेंट

http://www.iirmworld.org.in

बैंकिंग सेक्टर

अखिलेश पांंडे एएसएम, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया

भारत में बैंकिंग सेक्टर का इतना विस्तार हो गया है कि वाणिज्यिक और सहकारी बैंकों की 67 हजार से अधिक शाखाएं काम कर रही हैं। ऐसी उम्मीद की जा रही है कि 2040 तक भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बैंकिंग हब बन जाएगा। आने वाले दिनों में सरकारी बैंकों में हजारों की संख्या में भर्तियां होने के अलावा निजी बैंकों में भी तकरीबन डेढ़ लाख लोगों को नौकरी मिलने की संभावना है।

तरह-तरह के कोर्स

अब सर्टिफिकेट, डिप्लोमा और पीजी डिप्लोमा जैसे कुछ प्रोफेशनल कोर्स भी प्रचलन में आ गए हैं। ये कोर्स प्राइवेट बैंकों में करियर की राह तो आसान करते ही हैं, सरकारी बैंकों में पीओ, क्लर्क, आरबीआइ ऑफिसर्स की तैयारी कर रहे छात्रों को भी बैंकिंग की बारीकियां जानने का मौका देते हैं। बैंकिंग ऐंड फाइनेंस में डिप्लोमा कोर्स के लिए 12वीं पास होना चाहिए। यह कोर्स 12 महीने का है। पीजी डिप्लोमा इन बैंकिंग ऐंड फाइनेंस में एडमिशन लेने के लिए 50 फीसदी माक्र्स के साथ ग्रेजुएट होना जरूरी है। इसके लिए आयु सीमा है 21-27 वर्ष। पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन बैंकिंग ऐंड फाइनेंस में एडमिशन एप्टीटयूड टेस्ट और पर्सनल इंटरव्यू के आधार पर होता है।

कैसे होगी एंट्री?

प्रवेश परीक्षा में इंग्लिश लैंग्वेज, न्यूमेरिकल एबिलिटी, रीजनिंग और बेसिक चेकिंग पर बेस्ड क्वैश्चंस पूछे जाते हैं। फिर बारी आती है इंटरव्यू की। इंटरव्यू पास करने के बाद उन्हें इंटर्नशिप, एजुकेशन लोन, रोजगार गारंटी की जानकारी दी जाती है। बैंकिंग की जानकारी के अलावा बहुत-सी तकनीकी जानकारियां इन कोर्सेज को करने के बाद हो जाती हैं।

फाइनेंस सेक्टर

नीरू गोयल

फाइनेंशियल एडवाइजर, मैक्स लाइफ इंश्योरेंस

अच्छा फाइनेंशियल एडवाइजर बनने के लिए जरूरी है कि आपको फाइनेंस की भाषा की अच्छी समझ हो। इंटरमीडिएट के दौरान ही फाइनेंस में मेरा बहुत इंट्रेस्ट था। पीजी के बाद एक दोस्त की सलाह पर मैंने आइआरडीए द्वारा फाइनेंशियल एडवाइजर के लिए आयोजित एग्जाम दिया। मेरा सलेक्शन हो गया। तब से मैं मैक्स लाइफ में काम कर रही हूं।

कस्टमर ओरिएंटेड वर्क

अपने कस्टमर्स की फाइनेंशियल पोजीशन को सुधारने के लिए उपयोगी सलाह देने का काम फाइनेंशियल एडवाइजर करते हैं। इनका काम अपने ग्राहकों को निवेश, बचत योजनाओं, कर्ज आदि के बारे में सही सलाह देना होता है।

कोर्स और रोल

पहले केवल कॉमर्स के स्टूडेंट्स ही इस फील्ड में आते थे, लेकिन अब बीएससी (मैथ-बायो), बीए, बीबीए के स्टूडेंट भी एडमिशन ले सकते हैं। इसमें करियर बनाने के लिए एमबीए इन फाइनेंस, एमएस इन फाइनेंस, मास्टर डिग्री इन फाइनेंशियल इंजीनियरिंग जैसे कोर्स कर सकते हैं। फाइनेंशियल एडवाइजर किसी कंपनी में एकाउंटेंट, ऑडिटर, इंश्योरेंस सेल्स एजेंट, इंश्योरेंस अंडरराइटर, लोन ऑफिसर के तौर पर काम कर सकते हैं।

बिजनेस मैनेजमेंट

विकास चंद्र

एएसएम?(विज्ञापन), रेडियो मिर्ची

इंटरमीडिएट के बाद हमारे पास इतने ज्यादा ऑप्शंस होते हैं कि कोई भी कंफ्यूज्ड हो जाए। मैंने इन सारे ऑप्शंस में से बिजनेस मैनेजमेंट को चुना। दरअसल, मैंने अपनी क्वालिटीज को टटोला, उनकी एनालिसिस की। मुझे लगा मैं मार्केटिंग के लिए अच्छा हूं। फिर मैंने लखनऊ के आइएलएम से एमबीए किया। मुझे मीडिया से भी थोड़ा लगाव था। जब रेडियो मिर्ची के मार्केंिटंग सेक्शन में ऑफर मिला, तो ज्वाइन कर लिया।

मैनेजमेंट में संभावनाएं

बीबीए में जनरल व स्पेशलाइज्ड, कई तरह के कोर्सेज में एडमिशन के चांस होते हैं। स्पेशलाइजेशन में कम्प्यूटर एडेड मैनेजमेंट, बैंकिंग ऐंड इंश्योरेंस, टूर ऐंड ट्रैवल मैनेजमेंट, मॉडर्न ऑफिस मैनेजमेंट और इंटरनेशनल हॉस्पिटैलिटी आदि हैं। इसी तरह एमबीए का भी स्पेशलाइज्ड कोर्स है। शिक्षण संस्थानों में फाइनेंशियल मार्केट में ग्रेजुएट लेवल पर बीबीए और फाइनेंशियल मार्केट में एमबीए का भी कोर्स भी शुरू किया गया है। कोर्स में स्टॉक बाजार का माहौल किस तरह का है, किस तरह के प्रबंधन के बीच काम करने की जरूरत पड़ती है, फाइनेंशियल प्लानिंग किस तरह से की जाती है, इन तमाम बातों के बारे में बताया जाता है। कोर्स में दुनिया के अलग-अलग जगहों पर चलने वाले स्टॉक मार्केट का मैनेजमेंट किस तरह का है, यह भी बताया जाता है। स्टॉक एक्सचेंज की कार्यशैली कैसी है, वह किस तरह निवेशकों के बीच काम करता है, इसकी जानकारी दी जाती है।

कैसे पाएं एंट्री?

बीबीए में दाखिले के लिए 12वीं में 50 फीसदी अंकों के साथ पास होना अनिवार्य है। इसी तरह एमबीए में ग्रेजुएट तक 50 फीसदी अंकों के साथ पास होना चाहिए।

ई-कॉमर्स

दीपाली पांगसा

सीइओ, एंडिट्सन्यू डॉट कॉम

मैंने गाजियाबाद के आइएमटी से एमबीए किया, उसके बाद लंदन कॉलेज ऑफ फैशन से फैशन मार्केंिटंग मैनेजमेंट में डिप्लोमा किया। आठ साल तक कंसल्टेंट का काम किया, लेकिन मेरा सपना अपना ऑनलाइन स्टोर खोलने का था। इसे मैंने साकार?भी कर लिया।

ई-कॉमर्स में संभावनाएं

इंडिया में प्राइमरी लेवल पर इंटरनेट के जरिए प्रोडक्ट्स और सर्विस की डिस्ट्रिब्यूटिंग, बाइंग, सेलिंग, मार्केटिंग और सर्विसिंग की जाती है। इसमें मार्केटिंग, प्रमोशंस और वेबसाइट डेवलपमेंट और मैनेजमेंट में योग्यतानुसार आसानी से जॉब मिल सकती है।

स्ट्रेटेजी प्लानिंग ऐंड मार्केटिंग

मार्केट का ट्रेंड क्या है? किस तरह के प्रोडक्ट्स की डिमांड है? इसकी एनालिसिस के बाद प्रोडक्ट की पैकेजिंग और मार्केटिंग का काम होता है।

एड ऐंड प्रमोशन

इसमें क्लाइंट्स के लिए दूसरे नेटवक्र्स पर अपॉच्र्युनिटीज क्रिएट करते हैं। हालांकि इसे अंडरग्रेजुएट स्टूडेंट्स भी कर सकते हैं, फिर भी एमबीए या पीजीडीएम को वरीयता दी जाती है।

इंस्टीट्यूट्स

जिवाजी यूनिवर्सिटी, इंदौर, एमपी

http://www.jiwaji.edu

राजस्थान यूनिवर्सिटी, जयपुर

http://www.uniraj.ac.in

लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, फगवा?ा, पंजाब

http://www.lpu.in

शेयर मार्केट

स्टॉक मार्केट में वित्तीय लेखे-जोखे, रिसर्च और बाजार के आकलन से जुड़े तमाम तरह के काम हैं।

स्टॉक ब्रोकर्स

स्टॉक बोकर्स और कैपिटल मार्केट एक्सपट्र्स क्वालिफाइड एक्सपर्ट होते हैं, जो शेयरों की खरीद और बिक्री के बारे में सलाह देते हैं।

कैपिटल मार्केट स्पेशलिस्ट

ऐसे विशेषज्ञ म्यूचुअल फंड्स और फाइनेंशियल इंवेस्टमेंट कंपनियों में मार्केट में उभरते ट्रेंड पर नजर रखते हुए पूंजी निवेश संबंधी सलाह देते हैं।

सिक्युरिटी एनालिस्ट

सिक्युरिटी एनालिस्ट इनवेस्टमेंट एडवाइजर के रूप में ब्रोकरेज फर्मों, बैंकों, इंश्योरेंस कंपनियों आदि में मार्केट और इंडस्ट्री के बारे में सही-सटीक जानकारी के लिए नियुक्त किए जाते हैं।

इनवेस्ट मैनेजर्स

यह फाइनेंशियल पॉलिसीज के अनुसार इंडस्ट्री की प्रोग्रेस कैलकुलेट और मॉनिटर करते हैं।?

कैसे पाएं एंट्री?

कॉमर्स या इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएट इस फील्ड में आसानी से एंट्री पा सकते हैं, लेकिन अच्छा काम करने और तरक्की के लिए उन्हें स्टॉक मार्केट से संबंधित कोर्स भी कर लेना चाहिए। बड़ी ब्रोकिंग कंपनियां उन्हें प्रिऑरिटी देती हैं, जो पोस्ट ग्रेजुएट होने के साथ-साथ कैपिटल मार्केट, स्टॉक्स और सिक्युरिटी या फाइनेंशियल मैनेजमेंट से संबंधित कोई अन्य कोर्स किए होते हैं।

कॉन्सेप्ट ऐंड इनपुट :

अंशु सिंह, मिथिलेश श्रीवास्तव

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